मुनि श्री प्रज्ञासागर जी महाराज
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!! गुरु-शिष्य महामिलन !!

!! गुरु-शिष्य महामिलन !! 13 जनवरी 2017 कल सुबह 9 बजे इंदौर की पावन धरा पर एक बार फिर... पुष्पगिरी तीर्थ प्रणेता आचार्य श्री पुष्पदंत सागर जी महाराज ससंघ एवं तपोभूमि प्रणेता मुनिश्री प्रज्ञासागर जी महाराज ससंघ का.. महामिलन बॉम्बे हॉस्पिटल चौराहा,रिंग रोड में कल सुबह 9 बजें होगा।।वहाँ से शोभा यात्रा के साथ महालक्ष्मी [...]
guru shishya milan

!! गुरु-शिष्य महामिलन !!

13 जनवरी 2017
कल सुबह 9 बजे
इंदौर की पावन धरा पर एक बार फिर…
पुष्पगिरी तीर्थ प्रणेता आचार्य श्री पुष्पदंत सागर जी महाराज ससंघ एवं तपोभूमि प्रणेता मुनिश्री प्रज्ञासागर जी महाराज ससंघ
का..
महामिलन
बॉम्बे हॉस्पिटल चौराहा,रिंग रोड में
कल सुबह 9 बजें होगा।।वहाँ से शोभा यात्रा के साथ महालक्ष्मी नगर में मँगल प्रवेश होगा..

दुर्लभ संत समागम …अति दुर्लभ संत समागम
आचार्य श्री पुष्पदंत और प्रज्ञा सागर देखो आज मिले है यहाँ पर…समवसरण में महावीर से मिले हो जैसे गौतम…दुर्लभ संत समागम..
वर्ष 2014 में हुए महामिलन के दौरान प्रख्यात भजन गायक स्व.श्री रविन्द्र जी जैन दादु द्वारा लिखी गयी ये लाइने सार्थक हो गयी.
क्यों की…*
वर्ष 2014 के बाद एक बार फिर अहिल्या नगरी इंदौर गुरु शिष्य की चरण रज से पुनीत पावन हो गयी..
सौभाग्यशाली होते है वो जिन्हें गुरु का आशीर्वाद मिल जाया करता है…और वो एक लंबे समय के बाद साक्षात् गुरु अपना आशीर्वाद दे तो सोने वे सुहागा हो जाता है…पूज्य आचार्य श्री पुष्पदंत सागर जी महाराज से उनके ही द्वितीय शिष्य तपोभूमि प्रणेता मुनिश्री प्रज्ञा सागर जी महाराज अपने अनुज मुनिश्री प्रणाम सागर जी के साथ जैसे मिले …मिलते ही चरणों में जल की तरह समर्पित हो गए..और हाथों से जैसे ही गुरु चरण को छुआ ..ऐसा लगा मानों.. धरती ने आसमान को छु लिया हो..तपोभूमि प्रणेता को जैसे ही आचार्य भगवन ने गले लगाया…ऐसा लगा वर्षो बाद महाराज दशरथ से उनके पुत्र श्री राम मिल रहे हो..ये अदभुत ह्रदय को छु जाने पलो को देखते ही सभी भाव विभोर हो गए..इन दुर्लभ पलों को देखने के लिए समूचा इंदौर जैम समाज उमड़ पड़ा..
जैसे ही मंच पर आचार्य भगवन आये दोनों तरफ से दोनों शिष्य ऐसे आये जैसे त्रिवेणी महासंगम हो गया हो।।
भव्य शोभा यात्रा के साथ आचार्य संघ की अगवानी की गयी..जो की एक धर्म सभा में संपन्न हुई..रास्ते में आचार्य भगवन जिस तरह मुनिश्री प्रज्ञा सागर जी के हाथ थामे चल रहे थे उसे देख कर लग रहा था मानों माँ अपने लाड़ले के वर्षों बाद मिलने पर खुद को रोक नही पा रही हो और अपने हाथो में हाथ रख कर अपना सारा वात्सल्य लुटाना चाह रही हो..आचार्य भगवन का वात्सल्य देख ऐसा लग रहा था जैसे वात्सल्य का अमृत कलश संपूर्ण इंदौर में बरस रहा हो..इस तरह ये त्रिवेणी महासंगम एक बार फिर इंदौर के इतिहास में अपनी अमिट छाप छोड़ गया…
और इसपर तपोभूमि प्रणेता द्वारा ह्रदय से समर्पित की गये ये लाइनें भी इस गुरु शिष्य मिलन को सार्थक करती है…
मेरे गुरुदेव को दुनियाँ गुरु पुष्पदंत कहती है.”
गुरु भक्तों की हर टोली कृपालु संत कहती है..
जहाँ में और भी उनको बहुत कुछ लोग कहते है..
मेरी श्रद्धा,मेरी भक्ति उन्हें गुरु पुष्पदंत कहती है..

प्रज्ञासागर जी महाराज

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