अनमोल वचन
0

!! तपोभूमी प्रणेता विहार अपडेट !!

तपोभूमी प्रणेता विहार अपडेट 02-03-2017 गुरुदेव आज की आहार चर्या खेड़ीग्राम शासकीय विद्यालय झाबुआ से 12 km दूर दाहोद रोड पर में होगा।। तपोभूमि प्रणेता का एक साहसिक कदम.... 25 प्राचीन जैन मंदिरों का जीर्णोद्धार 25 मंदिरों में से एक झाबुआ के जैन मंदिर नसियाँ जी के दर्शन किये तपोभूमि प्रणेता ने झाबुआ स्थित प्राचीन नसियाँ में श्री [...]
WhatsApp Image 2017-03-01 at 16.42.44

तपोभूमी प्रणेता विहार अपडेट

02-03-2017

गुरुदेव आज की आहार चर्या खेड़ीग्राम शासकीय विद्यालय झाबुआ से 12 km दूर दाहोद रोड पर में होगा।।

16831974_1834194056840074_1205342446677781097_n

तपोभूमि प्रणेता का एक साहसिक कदम…. 25 प्राचीन जैन मंदिरों का जीर्णोद्धार 25 मंदिरों में से एक झाबुआ के जैन मंदिर नसियाँ जी के दर्शन किये तपोभूमि प्रणेता ने झाबुआ स्थित प्राचीन नसियाँ में श्री 1008 भगवान चन्द्रप्रभ जी की अति प्राचीन प्रतिमा के दर्शन कर अभिभूत हुए मुनिश्री प्रज्ञा सागर जी महाराज …उल्लेखनीय है की ये वही नसियाँ है जो मुनिश्री की प्रेरणा से जिसका 25 प्राचीन दिगम्बर जैन मंदिरों के जीर्णोद्धार के अंतर्गत पुनर्निर्माण हो रहा है..मुनिश्री की ये वो साहसिक प्रेरणा है जो आज पूरे भारत वर्ष के जीर्ण शीर्ण हो रहे अतिप्राचीन दिगंबर जैन मंदिरों के इतिहास को फिर से जीवित कर रही है …जिन मंदिरो की तरफ कोई नज़र उठा कर भी नही देखता था आज वो प्राचीन मंदिर स्वर्णिम आभा लिए जगमगा रहे है..कुछ मंदिर तो ऐसी स्थिति में थे एक ईंट हटे तो सारा मंदिर ढह जाए पर मुनिश्री ने इन मंदिरो को समाप्त करने की प्रेरणा नही दी बल्कि इन्हें सम्हालने की प्रेरणा दी क्यों को इनकी दीवारे ही इनका इतिहास है इन्हें जितना सम्हाल कर इनक जीर्णोद्धार हो सके किया जाना चाहिए..यदि बिलकुल ही जीर्णशीर्ण है तब इनका पुनर्निमाण किया जाये..इसी बात को ध्यान में रख कर गुरु भक्त श्री मदन भाई हूमड़ बड़ोदरा ने जिम्मा लिया अपने नेतृत्व में देश के 25 मन्दिरो के जीर्णोद्धार का … आज इनके एवं अनेको गुरु भक्तों के नेतृत्व में यह कार्य युद्ध स्तर पर ज़ारी है.. सबसे महत्वपूर्ण बात..मुनिश्री की इस प्रेरणा का जन्म हुआ था मुनिश्री के ही 25 वें रजत दीक्षा महोत्सव के अवसर पर..इस उत्सव को महामहोत्सव के रूप में एक दिन दो दिन नही बल्कि 25 दिनों तक मनाया गया वो भी श्री महावीर तपोभूमि उज्जैन की पावन धरा परऔर इसी अवसर पर मुनिश्री ने प्रेरणा दी की क्यों ना इस अवसर का युगों तक स्मरण रहे इसके लिए भारत के सभी प्रान्तों के 25 प्राचीन दिगंबर जैन मंदिरों जो की जीर्ण शीर्ण हो रहे है उन्हें गोद लिया जाए.. और उन्हें गोद लेकर उन्हें पुनः सँवारने का पुण्य कार्य किया जाए..फिर क्या था …प्रारंभ हुआ वह कार्य जो ,देश में प्रथम जैन मुनि है मुनिश्री प्रज्ञा सागर जी महाराज जिनके 25वें दीक्षा दिवस पर इस तरह का संकल्प लिया गया हो और इस तरह का ऐतिहासिक कार्य किया गया हो आज भारत के कोने कोने में ये 25 जैन मंदिर.. जिनागम की धर्म ध्वजा लहरा रहे है…

17015959_1835621403364006_3584760217980990495_o
16836104_1834788113447335_9019079589421254481_o
16938668_1834788130114000_5001148333677920251_n
16938954_1834788026780677_7693884821193922809_n
16996083_1834788046780675_2426605004194102803_n

हम नही दिगम्बर-श्वेताम्बर तेरापंथी स्थानक वासी…हम जैनी अपना धर्म जैन हम एक देव के विश्वासी.. इन पंक्तियों की सार्थकता तभी है जब सदभावन और एकता का सन्देश देने वाले हमारे साधू संत,दुर्लभ संत समागम कर संत एकता का परिचय देते है.. आज ऐसा ही कुछ अदभुत हुआ *सुप्रसिद्ध श्वेताम्बर जैन “मोहनखेड़ा तीर्थ”में… जब इस पावन तीर्थ पर चरण पड़े *दिगम्बर जैन संत तपोभूमि प्रणेता मुनिश्री प्रज्ञा सागर जी महाराज के…*जिनके आगमन पर भव्य आगवानी की  श्वेताम्बर जैन मुनि श्री जीतचंद्र विजय मुनि जी महाराज साब ने… दोनों ही संतो में इतना वात्सल्य झलक रहा था की सभी इस अदभुत संत मिलन को देख कर उपस्थित अनेकों भक्त भाव विभोर हो गए… होना ही था क्यों की जब आज एक ही पंथ को मानने वाले संत भी बमुश्किल मिल पाते है ऐसे समय पर दो अलग अलग पंथ को मानने वाले संत जब अत्यंत वात्सल्य से मिलते है तो जियो और जीने दो का सन्देश देने वाले भगवान महावीर का ये जैन धर्म सिर्फ इनके समागम से ही जयवंत हो जाता है.. आपसी मतभेद को भुला कर पंथवाद रीति रिवाज़ों को दरकिनार कर जब दो संत मिलते है समाज में इनके मिलन को देख कर ही एकता की मिसाल कायम होती है.. मुनिश्री ने मोहनखेड़ा तीर्थ का चप्पा चप्पा बड़े ही भक्तिभाव से निहारा… एक एक जिनालय और जिनप्रतिमा का अवलोकन किया..माना की दोनों पंथो में जिनप्रतिमाएं अलग अलग रूप में पूज्यनीय है..लेकिन णमोकार मन्त्र दोनों ही पंथो में स्वीकार है..दोनों का पंथो का रास्ता अलग अलग है पर मंज़िल का मुक़ाम एक ही है…तत्पश्चात मुनिश्री प्रज्ञा सागर जी महाराज ने श्वेताम्बर जैन संत श्री जीतचंद्र विजय जी मुनि के साथ संपूर्ण तीर्थ का अवलोकन किया एवं …. श्री राजेंद्र सूरीश्वर जी महाराज साब की प्रतिमा को विराजमान कर जो भव्य गुरु मंदिर* बनाया गया है..उसे भी देखा..मंदिर और तीर्थ की खूबसूरती यहाँ की दीवारों पर की गयी कलात्मक कारीगरी को देख कर पता चलती है… मुनिश्री अक्सर कहा करते है संत समाज में एकता का सन्देश देने आते है..क्यों की एकता के सूत्र से ही जैन धर्म विश्व शांति की कामना कर सकता है..इसके लिए जरुरी है हम संत ही सबसे पहले आत्मीयता से मिले ..हमारे संत मिलन से समाज में जो एकता का सन्देश जाएगा वही युगों युगों तक याद रखा जायेगा..धन्य है ऐसा जैन धर्म और धन्य है हमारे जैन संत । प्रकृति के सुरम्य वातावरण के बीच बना ये *मोहनखेड़ा तीर्थ* अपने आप में अनेको इतिहास को छुपा रखा है..एक बार आप यहाँ जरूर आये..

WhatsApp Image 2017-02-18 at 06.17.40

अतिशय क्षेत्र श्री बनेड़िया जी पर बोले तपोभूमि प्रणेता…

 

लम्बे अंतराल के बाद आया बनेडिया जी”…..मालवा के प्राचीन तीर्थों में एक तीर्थ है बनेडिया जी।कहते है एक भट्टारक जी इस मंदिर को लेकर आकाश मार्ग से जा रहे थे,तब उन्हें तालाब के किनारे यहाँ मनोरम दृश्य दिखा तो  उन्होंने मंदिर को यही पर उतार दिया।तब मंदिर यही पर स्थित है।ऐसी किंवदंती है।सच्चाई तो यह कि नींव रहित होने के कारण यह मंदिर इस बात को सत्य होने का संकेत भी देता है।और फिर कोई बात यदि कहीं जाती है तो कुछ न कुछ तो उसमें सच्चाई होती ही है।तभी ऐसी बात प्रचलन में आती है।भले ही इसे विज्ञानं की कसौटी में सही न माना जाये लेकिन हमारी आस्था और श्रद्धा इसकी सच्चाई को नकारने को राज़ी नहीं है। मैं पहले भी ड़ो तीन बार बनेडिया आया हूँ।पहली बार 1986 में गुरुदेव के साथ फिर शायद 1995 मेंतरुणसागर जी के साथ, फिर 2007 में तपोभूमि से विहार करके मैं यहाँ पर आया था।उसके बाद आज आना हुआ।मुझे यहाँ अच्छा लगता है।अब तो मंदिर की खूबसूरती भी बहुत बढ़ गई है।पिछले वर्षों में ज्यादा तो लेकिन बहुत काम हुआ है।आज यहाँ आकर अच्छा लगा। आप भी एक बार बनेड़िया जी आकर इस अदभुत जिनालय के दर्शन जरूर करे..

गौतमपुरा मँगल प्रवेश…

सदभावना और एकता की एक नई मिसाल बन गया तपोभूमि प्रणेता का मँगल प्रवेश..” झिलमिला उठा नगर,हर गली हर डगर, नगरी में करुणानिधान आ गए, आज भक्तों के घर भगवान आ गए”
संत जब नगर में आता है तो ख़ुशहाली अपने आप आगे आगे चली आती है..खुशाली ही नही अपितु आपसी प्रेम स्नेह और एकता का सन्देश भी देती है एक दिगम्बर जैन संत की मौज़ूदगी… इस बात का प्रत्यक्ष उदाहरण आज गौतमपुरा नगर में देखने को मिला…
आज दिगम्बर जैन संत *तपोभूमि प्रणेता मुनिश्री प्रज्ञा सागर जी महाराज* का ससंघ भव्य मंगल प्रवेश गौतमपुरा में हुआ..वर्षो पधारे मुनिराज के स्वागत में जैन समुदाय ही नही अपितु समस्त धर्म को मानने वाले भी पीछे नही रहे…सभी ने गुरुदेव का भव्य स्वागत किया कोई फूलों से पुष्प से कर रहा था तो कोई पाद प्रक्षालन की थालियाँ सजा कर ..पूरे गौतमपुरा को दुल्हन की तरह सजा दिया गया था.. तो रणद्वार,रँगोली और रंग बिरंगे कागज़ उड़ती गुलाल वातावरण को मनमोहक बना रही थी..
बोहरा समाज द्वारा हाथ जोड़ कर अभिवादन और पुष्प समर्पित कर स्वागत अद्वितीय और अनूठा था
इससे बड़ी सदभावना एकता की मिसाल आप क्या देखना चाहेंगे..की मुनिश्री प्रज्ञा सागर जी महाराज जैन संत ही नही बल्कि *जन संत* है.. जिनकी चरण रज से नगर नगर पावन पुनीत हो रहे है..भक्ति जब रस्मो रिवाज के बंधन को भी दरकिनार कर देती है तब ऐसी भक्ति आस्था सड़को पर दिखाई देती है..और ये सब सिर्फ महापुरुषों के आने से ही संभव हो पाता है.. वर्ष 2005 से अब तक गौतमपुरा जैन समाज मुनिश्री से जुड़ी हुई है जो आज भी कायम है ! जैन समाज ही नही अपितु जन-जन यहाँ का मुनिश्री जी वाणी का दीवाना है तभी तो यहाँ की आनंद यात्रा में अपार जन समूह उमड़ता है… मुनिश्री का जैन समाज द्वारा अनेको रजत थाल सजा कर पाद प्रक्षालन किया गया..सामाजिक संस्थाओ के साथ साथ राजनैतिक संस्थाओं द्वारा भी मुनिश्री का अभिवादन वंदन किया गया …किसी ने सच ही कहा है..
संत के आने से हर दिन ख़ुशहाली है, हर दिन दशहरा ,हर रात दिवाली है

16711467_1830044110588402_1825318931979185063_n
16729006_1830044093921737_1056310836209788326_n
16729425_1830044113921735_2798340319352799999_n

चलते-चलते… तपोभूमि प्रणेता ने लगाई… ”सँस्कारो की पाठशाला”

 

यूँ तो जैन साधू विहार करते करते अनेको गाँवो से गुजरता है..पर हर साधू हर गांव में सँस्कारो का पाठ नही पढ़ा पाता.. क्यों की गाँव में पहुँच कर विश्राम कर के आगे बढ़ जाता है…पर तपोभूमि प्रणेता इकलौते ऐसे जैन संत है जो राह चलते चलते भी जन जन को भगवान महावीर का सन्देश अपनी अमृत वाणी के द्वारा सुनाते जा रहे है.. ये सुनने में तो सरल लगता है पर इतना सरल भी नही होता क्यों की रास्ते में पड़ने वाले गाँव वाले इस जैसे नही होते कुछ सुनते है कुछ नही..पर जब बात जैन संत की हो उनका दिगम्बर रूप ही सन्देश दे जाता है.. मुनिश्री प्रज्ञा सागर जी महाराज का मँगल विहार तपोभूमि से गोमटेश्वर के लिए चल रहा है…रोज़ नए नए गाँव आ रहे है रोज गुरुदेव राहगीरों को शाकाहारी और अहिसँक होने का संकल्प दिलवा रहे है.. जो की अभी यात्रा शुरू हुए कुछ दिन ही हुए है..इसी श्रृंखला में आज चंद्रावतीगंज में स्वामी विवेकानंद स्कूल में हज़ारों छात्र छात्राओं के समक्ष मुनिश्री ने अपनी बात रखी..
बातो बातों में संस्कार की वो घुटी गुरुदेव ने पिलाई जिसे बच्चे ताउम्र याद रखेंगे.. मुनिश्री ने कहा.. अभी वक़्त इम्तिहानों का चल रहा है परीक्षा के इस समय पर डरने की जरुरत नही है बल्कि समझदारी और साहस की जरुरत है…क्यों की इम्तिहानों से डरते वो है जिन्होंने साल भर कुछ नही पढ़ा..हमने तो साल भर पढ़ा है शिक्षकों ने जी भर कर पढ़ाया है तो अब उसका प्रतिफल पाने का समय है..
इम्तिहानों ने हर्गिज़ ना मुँह चुराना चाहिए..बल्कि में ऐसे में खुद को आज़माना चाहिए..बाँसुरी की ज़िन्दगी से तू सीख ले ये ..लाख सीने में ज़ख्म में मुस्कुराना चाहिए…मुनिश्री ने कहा आज बच्चे जरा से एग्जाम आते है घबराकर गलत कदम उठा लेते है याद रखो हमारा एक गलत कदम हमारा साल बर्बाद लार सकता है..मुनिश्री ने कहा यदि विद्यालयो में शिक्षा के साथ संस्कार भी दिए जाये तो हम इस पीढ़ी को भी सुधार सकते है..स्वामी विवेकानंद जिन्होंने सात समुंदर पार भी अपने सँस्कारो को ज़िंदा रखा ..हम अच्छी पढाई से ग्रेजुएट तो हो सकते है पर ग्रेट नही…ग्रेट होने के लिए जीवन में सँस्कारो का होना बहुत जरुरी है..इसी के साथ मुनिश्री ने उपस्थिति बच्चों को माँस, शराब और सप्तव्यसनो का त्याग कराया साथ शाकाहार का भी संकल्प दिलाया..अंत में मुनिश्री ने सभी छात्र छात्राओ को गाडी चलाते समय मोबाइल में बात नही करने का भी संकल्प दिलाया.. इस तरह चलते चलते तपोभूमि प्रणेता सँस्कारो का पाठ पढ़ाया..

03-01-16
24-01-16
27-12-15

प्रज्ञासागर जी महाराज

There are 0 comments

Leave a comment

Want to express your opinion?
Leave a reply!

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may use these HTML tags and attributes: <a href="" title=""> <abbr title=""> <acronym title=""> <b> <blockquote cite=""> <cite> <code> <del datetime=""> <em> <i> <q cite=""> <strike> <strong>